सोमवार, 18 अगस्त 2025

श्यान नदी और और समाज - प्रतीकात्मक कथा

श्यानता क्या है? आप इसको कला साहित्य या विज्ञान के संदर्भ में भी समझ सकते हैं।

तो पहले एक प्रतीकात्मक कथा सुनते हैं जिससे हम अपने भीतर की श्यानता के स्याह पक्ष को समझ कर उसे कम करें—

“श्यान नदी”

(जब प्रवाह रुक जाए)

बहुत समय पहले एक शांत प्रदेश था — जहाँ से एक सुंदर नदी बहती थी। उसका नाम था "जीवनधारा"।

लोग कहते थे,

"यह नदी न केवल जल देती है, यह हमारे सपनों को भी बहा ले जाती है।"

नदी की धारा तेज़ थी, निर्मल थी, और जीवन से भरी थी। लेकिन धीरे-धीरे, गाँव में लोग आलसी होने लगे।किसी ने खेत नहीं जोते। किसी ने नावें नहीं चलाईं। नदी किनारे मंदिर, पुस्तकालय, पाठशालाएँ — सब सूने पड़ने लगे।

किसी ने कहा,

"अब कुछ करने की ज़रूरत नहीं। नदी अपने आप चलती रहेगी।"

लेकिन एक दिन, लोगों ने देखा कि नदी की गति धीमी हो गई है।फिर धीरे-धीरे, वह गाढ़ी होने लगी... उसका पानी अब वैसा पारदर्शी नहीं रहा।

वह अब चिपचिपी हो गई थी —जैसे उसके भीतर कुछ जमा हो गया हो।

लोगों ने कहा:

"नदी बीमार हो गई है!"

एक बूढ़े ऋषि आए। उन्होंने पानी का स्वाद चखा, और कहा:

"यह अब जल नहीं, श्यानता है —यह प्रवाह नहीं, यह जड़ता है।यह वही नदी है, जो काम, ज्ञान और सृजन की ऊर्जा से बहती थी।लेकिन अब इसमें कुछ नया नहीं डाला जा रहा — न विचार, न कर्म।यही इसका रुक जाना है। यही इसका श्यान हो जाना है।"


तात्पर्य (Moral):

जहाँ प्रवाह रुक जाता है — वहाँ श्यानता जन्म लेती है।चाहे वो नदी हो, समाज हो, या विचार।गति और सृजन ही जीवन है।जड़ता... श्यानता... अंत का पहला संकेत है।

अब श्यानता के मूलाधार की ओर चलते हैं और उसके अनेकानेक पहलुओं से अवगत होते हैं —

अर्थ (Meaning):

"श्यान" (Syan) एक संस्कृत मूल का शब्द है, जो आमतौर पर गति, प्रवाह या कार्यशीलता की कमी को दर्शाने के लिए उपयोग होता है।

उदाहरण:

"तेल बहुत श्यान हो गया है।"= तेल गाढ़ा हो गया है, अब वह आसानी से नहीं बहता।

"उसकी सोच में श्यानता थी।" (रूपक में)= उसकी सोच जड़ हो चुकी थी, लचीलापन नहीं था।


वैज्ञानिक संदर्भ में:

"श्यानता" (Viscosity) विज्ञान में एक भौतिक गुण होता है — जैसे शहद या घी की गति तेल की तुलना में धीमी होती है। तो कहा जाता है:

"शहद की श्यानता अधिक होती है।"

व्युत्पत्ति:

संस्कृत "श्यन्" धातु से बना है, जिसका संबंध रुके हुए प्रवाह से है।"श्यान" = जो प्रवाहित न हो रहा हो, या जिसकी गति धीमी हो।

विस्तार से कहें तो:

"श्यान" किसी भी तरल, विचार, समाज या मानसिकता के लिए प्रयोग हो सकता है जहाँ गति, प्रवाह या गतिशीलता में कमी हो।

खैर, कलयुग में —

"विचारों का शहद बन गया है आजकल – बहते नहीं, बस चिपक जाते हैं दीवारों पर।"